Sc/St Act का अगर विरोध करना ही है तो पहले POA यानी कि Prevention of Atrocity Act 1989 (अत्याचार की रोकथाम) समझना होगा।
आप किसी राजनीतिक पार्टी का चश्मा उतार के देखेंगे तब समझ मे आ जायेगा। इस ऐक्ट से किसी दलित या किसी सवर्ण का कोई नुक्सान नही है यहां सिर्फ एक हिंदू भाई परेसान हो रहा था उसके रोकथाम के लिये कानून लाया गया। और इस कानून में ये कहां लिखा है कि सिर्फ सवर्णों को सजा देना है।
#DevideAndRule ये बिल्कुल सत्य लगता है मुझे कुछ जानकारी देनी है कि किस तरह से हिंदू बाहुल्य समुदाय को कमजोर किया गया और फिर उल्टे हम पर ही राज किया गया है।
भारत की 2011 की जनगणना के अनुसार हिन्दुवों की घटती संख्या और उनका वर्चस्व के आकड़े देखेंगे तो पता चलेगा की हिंदू हित को ध्यान में न रखते हुये हमने अपनी अपनी जातियों के हितों को ज्यादा ऊपर रखा उसी का परिणाम है ये कि जातियों के आधार पे पार्टीयोँ का उदय हुआ।
जातिगत राजनीति से भारत और विशेषकर हिंदू आबादी कमजोर होती चली गयी, हम क्यों न अपने अहंकार को त्यागकर सिर्फ अपने हिंदुस्तान को हिंदू भाईयों के सशक्तीकरण को ध्यान में क्यों नही रखते है?
भारतीय हिंदुओं की कुल जनसंख्या 1,056,360,000 (2016)
सबसे कम आबादी के राज्य।
जम्मू-कश्मीर, लक्षद्वीप द्वीप समूह, पंजाब, मेघालय, मिजोरम और नागालैंड ।
हिंदू की मिश्रित आबादी के राज्य।
कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडू और त्रिपुरा।
हिंदू बाहुल्य आबादी के राज्य।
बंगाल, उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र और उत्तराखंड।
क्या है SC-ST एक्ट?
अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लोगों पर होने वाले अत्याचार और उनके साथ होनेवाले भेदभाव को रोकने के मकसद से अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार रोकथाम) अधिनियम, 1989 बनाया गया था. जम्मू कश्मीर को छोड़कर पूरे देश में इस एक्ट को लागू किया गया.
इसके तहत इन लोगों को समाज में एक समान दर्जा दिलाने के लिए कई प्रावधान किए गए और इनकी हरसंभव मदद के लिए जरूरी उपाय किए गए. इन पर होनेवाले अपराधों की सुनवाई के लिए विशेष व्यवस्था की गई ताकि ये अपनी बात खुलकर रख सके।
क्यों बनाया गया था ये एक्ट?
1955 के 'प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स एक्ट' के बावजूद सालों तक न तो छुआछूत का अंत हुआ और न ही दलितों पर अत्याचार रुका. यह एक तरह से एससी और एसटी के साथ भारतीय राष्ट्र द्वारा किए गए समानता और स्वतंत्रता के वादे का उल्लंघन हुआ. देश की चौथाई आबादी इन समुदायों से बनती है और आजादी के तीन दशक बाद भी उनकी आर्थिक और सामाजिक स्थिति तमाम मानकों पर बेहद खराब थी.
ऐसे में इस खामी को दूर करने और इन समुदायों को अन्य समुदायों के अत्याचारों से बचाने के मकसद से इस एक्ट को लाया गया. इस समुदाय के लोगों को अत्याचार और भेदभाव से बचाने के लिए इस एक्ट में कई तरह के प्रावधान किए गए.
क्या है इस एक्ट के प्रावधान?
एससी-एसटी एक्ट 1989 में ये व्यवस्था की गई कि अत्याचार से पीड़ित लोगों को पर्याप्त सुविधाएं और कानूनी मदद दी जाए, जिससे उन्हें न्याय मिले. इसके साथ ही अत्याचार के पीड़ितों के आर्थिक और सामाजिक पुनर्वास की व्यवस्था की जाए.
इस एक्ट के तहत मामलों में जांच और सुनवाई के दौरान पीड़ितों और गवाहों की यात्रा और जरूरतों का खर्च सरकार की तरफ से उठाया जाए. प्रोसिक्यूशन की प्रक्रिया शुरू करने और उसकी निगरानी करने के लिए अधिकारी नियुक्त किए जाए. और इन उपायों के अमल के लिए राज्य सरकार जैसा उचित समझेगी, उस स्तर पर कमेटियां बनाई जाएंगी. एक्ट के प्रावधानों की बीच-बीच में समीक्षा की जाए, ताकि उनका सही तरीके से इस्तेमाल हो सके. उन क्षेत्रों और पता लगाना जहां एससी और एसटी पर अत्याचार हो सकते हैं और उसे रोकने के उपाय करने के प्रावधान किए गए।
जब हम इतिहास उठा करके देखेंगे तो पता चलेगा कि किस तरह से समाज मे बुराईयां थी, हमने खुद अपने आप को कमजोर किया है और उसके लिये न तो सवर्ण दोषी और न ही हमारे दलित भाई दोषी है। तो केन्द्र सरकार को हिंदू समाज पे अत्यचार की रोकथाम के लिये कानून लाना बिल्कुल सही है।
हमारे पुराण और देवी देवताओं की कहानियों मे समरसता की भावना के साथ साथ मनुष्य का कल्याण का उल्लेखनीय है।
हमारे ऋषि मुनियों ने सिर्फ और सिर्फ विद्वता को ही अपना पहचान बनाया। आज इस्लाम और मिशनरी लगातार हिंदू भावनावों के उपर कुठाराघात किया गया।
आज जब समस्त धर्म सम्प्रदाय के लोग सिर्फ अपने धर्म का प्रचार प्रसार करने मे व्यस्त है तब ठीक उलट हम अपने धर्म को कमजोर कर रहे हैं।
कुछ दिनों पहले जब मैने अपने फेसबुक पेज पर दिलीप हिंदू शब्द जोड़ा तो सबसे ज्यादा चोरी छिपे विरोध होता रहा कि मैं अपना जाति के खिलाफ कर रहा हूँ।
लेकिन मेरा मानना है कि जाति नही धर्म प्रथम होना चाहिये जिससे हमारी पहचान और व्यापक होगी।
#मायावती #अखिलेश_यादव और #कांग्रेस पार्टी के खिसकते जनाधार के कारण ये एक सोची समझी सजिश के तहत पहले दलित भाईयों पे अत्याचार की निराधार खबरें फैलायी गयी फिर सरकार ने जब उस फैसले को दोबारा लागू करवा दिया जिसको ध्वनि मत से पारित कर दिया गया, इसका मतलब सभी पार्टी ने मिलकर और एक मत से पारित कराया तो भाजपा के उपर आरोप क्यों लगाया जा रहा है। और जब सरकार ने सर्व सम्मति से पारित करवा लिया, तो विपक्ष द्वारा लगाया गया आरोप खारिज हो गया, तो अब निराधार खबरें फैलायी जा रही है कि सरकार ने सवर्णों के विरोध मे SC ST ACT में संशोधन किया।
अब लगातार विपक्ष के ठेकेदार लोग जिनको कोई राजनीतिक समझ नही है केन्द्र सरकार को सवर्णों के खिलाफ साबित करने में लगे है।
तो जनता को फैसला करना है कि अगर शरीर के किसी अंग मे तकलीफ है तो उसकी रक्षा करनी चाहिये इससे दुसरे किसी अंग को तकलीफ देने का प्रश्न ही नही होता है।
एक बात स्पष्ट कर दूँ कुछ तथकथित चाटुकार नेता जो POA ACT 1989 की तुलना मण्डल आयोग से कर रहे है तो उनको कोई विषय की जानकारी नही है। दोनो कानून बहुत भिन्न है।
सादर साभार
आपका
दिलीप
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