Thursday, 18 January 2018

हम जैसे चलते है, तुम भी चलो न!!!!!!

दोस्तों हम सभी इस धरती संसार में है उसका कोई न कोई उद्देश्य होता है। ऐसे ही ये गीत बहुत ही सुंदर मनमोहक है।।


हम जैसे चलते है,तुम भी चलो न!हम जैसे रहते हैं,तुम भी रहो न!!
नदियां यूं बहती है,कंकड़ पत्थर बहते है!
बहते बहते वो तो सागर मे मिल जाती हैं!!
नदियां ये कहती है तुम भी बहो न !हम जैसे बहते है,तुम भी बहो न!!
हम जैसे..…...…................!!!
पत्थर की ये मूरत देखो,पहले तो ये पत्थर थी !
घावों को सहते सहते,मूरत बन गयी ये देखो!!
मूरत ये कहती है तुम भी बनो न ! हम जैसे सहते है तुम भी सहो न!!
हम जैसे.....…...................!!!
नन्हे नन्हे दीपक देखो,जगमग जगमग करते है!
खुद को जलाकर ये, अन्धेरा दूर करते हैं!!
दीपक ये कहते है,तुम भी करो न! हम जैसे जलते है,तुम भी जलो न!!
हम जैसे............................!!!

धन्यवाद
दिलीप शुक्ल 

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